Top 10 Places in Varanasi to Visit
1.काशी विश्वनाथ मंदिर
काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के घाटों के बीच स्थित एक ऐसा धार्मिक केंद्र है जहां की पवित्रता और इतिहास का गहरा संगम मिलता है इस मंदिर का मुख्य देवता भगवान शिव है जिन्हें यहां विश्वनाथ दैनिक संपूर्ण विश्व के स्वामी के रूप में पूजा जाता है कहा जाता है किस स्थान पर पहले एक छोटा शिल्प था जिसे 12वीं शताब्दी में राजा रजनीगंधा ने पुनः स्थापित किया बाद में 17वीं शताब्दी में महाराजा रणजीत सिंह ने वर्तमान मंदिर का निर्माण करें इसकी चमकदार स्वर्ण जड़ित छत और नकाशीय विधि दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर देती है काशी विश्वनाथ मंदिर का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अति महत्वपूर्ण है यहां पर हर साल महाशिवरात्रि कार्तिक पूर्णिमा और नवरात्रि जैसे बड़े उत्सव बड़े धूमधाम से बनाए जाते हैं इसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं मंदिर के पास स्थित काशी विश्वनाथ गली में विभिन्न प्रकार के शिल्प पुस्तक और प्रसाद की दुकान मिलती हैं जो कि स्थान की जीवंतता को और बढ़ाती है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार इस मंदिर को कई बार आक्रमणों और पुनर्निर्माणों का सामना करना पड़ा लेकिन हर बार या फिर से उठ खड़ा हुआ है जो इसकी अनंत शक्ति और श्रद्धा का प्रमाण है आज भी काशी विश्वनाथ मंदिर में न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के शिव भक्त के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल बना हुआ है जहां जाकर मां को शांति और आत्मा को मोक्ष की अनुभूत प्राप्त होती है

2.अस्सी घाट
अस्सी घाट वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है जो अपनी सुंदरता और शांति के लिए जाना जाता है यह घाट गंगा नदी के किनारे स्थित है और यहां पर अस्सी नदी गंगा में मिलती है जो एक पवित्र संगम माना जाता है
अस्सी घाट पर कई मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जो इसकी सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं यहां पर भगवान हनुमान का एक प्रमुख मंदिर है जो अपनी सुंदर प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है घाट पर कई पंडित और पुजारी भी हैं जो श्रद्धालुओं को पूजा और आरती करने में मदद करते हैं अस्सी घाट पर शाम को गंगा आरती का आयोजन किया जाता है जो एक आकर्षक और पवित्र अनुभव होता है यहां पर कई लोग आते हैं जो गंगा जी में डुबकी लगाते हैं और अपनी आत्मा को शांति प्रदान करते हैं अस्सी घाट वाराणसी का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है अस्सी घाट पर कई दुकानें और होटल भी हैं जहां पर आप नाश्ता और स्वादिष्ट भोजन भी कर सकते हैं और अपनी यात्रा को सुखद बना सकते हैं

3.दशाश्वमेध घाट
दशाश्वमेध घाट वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध घाटों में से एक है जो गंगा के किनारे स्थित है और अपनी ऐतिहासिक धार्मिक महत्वता के कारण यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है कहा जाता है कि इस स्थान पर प्राचीन काल में 10 राजाओं में एक साथ यज्ञ किया था इसे तभी से दशाश्वमेधघाट नाम मिला खाट के सामने काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है जिससे यहां का माहौल और भी पवित्र हो जाता है हर शाम को यहां गंगा आरती का आयोजन होता है जिसमें सैकड़ो दीप प्रज्वलित होते हैं शंख और घंटी बजती हैं और यहां के भजन से वातावरण पवित्र हो जाता है आरती के समय वहां पर मौजूद श्रद्धालुओं द्वारा हाथों में दीप लेकर जलती लौ को गंगा में बहते है यहां के स्थानीय दुकानदार चाय पान मिठाई और हस्तशिल्प की वस्तुएं बेचते हैं जिससे घाट और भी जीवंत दिखाई पड़ता है यहां पर छोटे-छोटे मंदिर और आश्रम भी हैं जहां साधु संत ध्यान करते हैं घाट के किनारे स्थित पठार की सीढ़ियां गंगा के जल तक जाती है जहां लोग स्नान करके अपने पाप को धुलते है शाम के समय जब सूर्य अस्त होता है तो घाट पर सुनहरी रोशनी फैल जाती है और पूरा दृश्य मंत्रमुग्ध कर देता है यहां की हवा में बसी धूप धूप में चमकते जल के कान और आरती की सुगंध मिलकर एक अद्भुत अनुभूति प्रदान करती हैं यदि आप वाराणसी की यात्रा करते हैं तो दशाश्वमेध घाट पर अवश्य जाएं क्योंकि यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यहां की संस्कृति और इतिहास को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है इस घाट पर आने वाले प्रत्येक यात्री को यहां की शांति प्रेम और भक्ति का अनुभव होता है और वह अपने जीवन में ऊर्जा और आशा लेकर लौटते हैं जिससे उनका मन संतुष्ट रहता है

4. मणिकर्णिका घाट
मणिकर्णिका घाट वाराणसी के सबसे प्राचीन और पवित्र घाटों में से एक है जो गंगा के किनारे स्थित है और हिंदू धर्म में अनंत महत्व रखता है कहा जाता है कि इस घाट का नाम देवी पार्वती के कान की मनिका (रत्न) से पड़ा जो यहां के जाल में गिरकर शुद्ध हो गई थी स्कंध पुराण के अनुसार भगवान शिव ने यहां अपने त्रिशूल से जल को विभाजित किया और इस जल को अमर जल कहा गया जिससे इस स्थान को मोक्ष की प्राप्ति का द्वारा माना जाता है इतिहास की बात करें तो ऐसा कहते हैं मणिकर्णिका घाट का उल्लेख प्राचीन ग्रंथो में कई बार मिलता है महाभारत के वन पर्व में इसे अमर जल के रूप में वर्णित किया गया है जहां पांडवों ने अपने पापों को धुला था और बौद्ध ग्रंथ में इस घाट को वज्र ज्योति कहा गया है जो ज्ञान की रोशनी का प्रतीक है मध्ययुग में कई राजाओं ने यहां विशाल शमशान घाट बनवाया जिससे यह शमशान स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध हुआ 18 वीं शताब्दी में महाराजा शिवाजी ने इस घाट को पुन स्थापित कर यहां के शमशान को संगमरमर की पंक्तियों में सजाया जिससे आज का मणिकर्णिका घाट बन सका धार्मिक दृष्टि से मणिकर्णिका घाट को मुक्ति का द्वारा माना जाता है यहां पर मृत्यु के बाद शवों को जलने से मोक्ष प्राप्त होता है ऐसी मान्यता है कि हर दिन सैकड़ो लोग यहां आकर अपने प्रिय जनों के अस्थि- ध्वज को जल में विसर्जित करते हैं जिससे वातावरण में एक अद्भुत शांति और धूप छांव का मिश्रण बनता है इस घाट की सौंदर्य अद्भुत है संक्षेप में मणिकर्णिका घाट न केवल एक शमशान स्थल है बल्कि यहां हिंदू धर्म की गहरी आध्यात्मिकता इतिहास और संस्कृत का जीवंत प्रतीक है यहां की प्रत्येक पत्थर और प्रत्येक ध्वनि में अनंत कहानी समाहित हैं जो हर आगंतुक को मोक्ष की ओर एक कदम आगे बढ़ाने का संदेश देती हैं

5 .भारत माता मंदिर
भारत माता मंदिर वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के परिसर में स्थित एक अनोखा स्मारक है इसे 1936 में स्वतंत्रता संग्राम से नई बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने बनवाया था और इस वर्ष 25 अक्टूबर को महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन किया इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां किसी देवी देवता की मूर्ति नहीं है बल्कि एक विशाल संगमरमर की नक्काशी है जो अखंड भारत के भू अग्निकीय स्वरूप को दर्शाती है इस नशे में हिमालय गंगा यमुना कावेरी जैसी प्रमुख नदियों और पहाड़ों को बारीक रूप से दर्शाया गया है जिससे हर आगंतुक को राष्ट्र की एकता और विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव होता है मंदिर के खुलने का समय सुबह 9:30 बजे से रात 8:00 बजे तक का है दो प्रमुख दर्शन समय माने जाते हैं पहले सुबह 9:30 से 11:00 बजे तक जब नशे पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं और दूसरा समय शाम को 6:30 से 7:30 बजे तक जब दीप जलते हैं और शंख की ध्वनि से वातावरण पवित्र हो जाता है इन क्षणों में यहां का माहौल राष्ट्रीय गर्व और शांति से भर जाता है जो हर यात्री के हृदय में भारत माता के प्रति श्रद्धा को गहरा करता है यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश के प्रति प्रेम और आशा का नया सपेरा मिलता है

6. तुलसी मानस मंदिर
तुलसी मानस मंदिर वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्थित एक अद्वितीय धार्मिक स्थल है इसे 1965 में निर्मित किया गया था जब विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉक्टर विजेंद्र शरण ने गीता और रामायण के समन्वय को दर्शाने वाले एक मंदिर की कल्पना है इस मंदिर का नाम तुलसीदास जी के मानस ग्रंथ से लिया गया है जिसमें उन्होंने रामचरितमानस को सरल हिंदी में प्रस्तुत किया था मंदिर के भीतर मुख्य शिखर पर शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित है जबकि चारों ओर राम सीता लक्ष्मण और हनुमान की छोटी-छोटी मूर्तियां रखी गई है जो भक्तों को ईश्वर के विभिन्न रूपों का स्मरण करती है तुलसी मानस मंदिर की सबसे खास बात इसका सिर्फ है पूरी दीवारों पर रामायण के प्रमुख प्रसंग को नक्काशी के माध्यम से दर्शाया गया है जिससे हर आगंतुक को कथा का दृश्य अनुभव होता है सुबह के समय जब सूरज की पहली किरणें मंदिर के पत्थर पर पड़ती हैं तो पूरा परिसर सुनहरी रोशनी से भर जाता है और शांति का अनूठा माहौल बनता है दर्शन के लिए मंदिर प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है और विशेष अवसरों जैसे रामनवमी और तुलसीदास जयंती पर विशेष आरती तथा प्रवचन आयोजित होते हैं इस स्थान पर आने वाले यात्री न केवल धार्मिक भावना को महसूस करते हैं बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ भी प्राप्त करते हैं तुलसी मानस मंदिर वाराणसी की आध्यात्मिक धरोहर में से एक है

7. रामनगर किला
रामनगर किला वाराणसी के गंगा किनारे स्थित एक प्राचीन किला है जिसका निर्माण महाराजा बलवंत सिंह ने करवाया था यह किला मुल्तान राजसी महल और रक्षा स्थल के रूप में बनवाया गया जिससे अपनी राजसी ठाठ-बाठ और शत्रु से सुरक्षा दोनों सुनिश्चित कर सकें किले की वास्तुकला में मुगल राजपूत शैली का मिश्रण देखा जाता है मोती ईट की दीवारें और विस्तृत बगीचे इस बात की गवाही देते हैं कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में इस किले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब विद्रोहियों ने यहां से अंग्रेजी फौज पर हमला किया था आज रामनगर किला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है जहां लोग इतिहास की झलक पाने और गंगा के सुंदर दृश्य का आनंद लेने आते हैं शाम के समय जब सूर्य की रोशनी किले की दीवारों पर पड़ती है तो यह स्थान अपने आप एक अद्भुत माहौल पैदा करता है या स्थान पर्यटन स्थल के रूप में बहुत अच्छा स्थान है और लोकप्रिय भी है

8. हरिशचंद्र घाट
हरिशचंद्र घाट वाराणसी के सबसे प्राचीन और पवित्र घाटों में से एक है जो गंगा के किनारे स्थित है कहां जाता है कि इस स्थान का नाम राजा हरिश्चंद्र के नाम पर पड़ा जो सत्य और धर्म के प्रति अपने अनन्य निष्ठा के कारण प्रसिद्ध थे घाट के पास ही उनका पुराना श्मशान स्थल है जहां आज भी अनगिनत शवों को जलाया जाता है यह स्थान मुक्ति का द्वारा माना जाता है हरिशचंद्र घाट का इतिहास शताब्दियों पुराना है परंतु 18 वीं सदी में महाराजा राजा रावण सिंह ने इसे पुन स्थापित कर विस्तृत सिद्धियां और पत्थर की बनी बेंच बनवाई घाट पर रोजाना स्वयं कल में होने वाली गंगा आरती जलती दीपों की रोशनी और शंख की धुन से वातावरण को अद्भुत शांति मिलती है यहां के किनारो पर स्थित छोटे-छोटे पुजारी और पंडित यात्रियों को प्राचीन कथा सुनाते हैं जिसमें हर आगंतु को भारतीय संस्कृति और धर्म की गहरी अनुभूति होती है

9. काल भैरव मंदिर
काल भैरव मंदिर वाराणसी के काशी खंड में स्थित एक प्राचीन शक्ति स्थल है कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने अपने रौद्र रूप को शांत करने के लिए किया था यहां भैरव को काल अर्थात समय का स्वामी माना जाता है मंदिर का मुख्य शिखर काले पत्थर से बना है जिस पर जटिल नकाशी रात के अंधेरे में भी चमकती हुई प्रतीत होती है इतिहास में कहा गया है इस स्थान का उल्लेख पुराणों में मिलता है परंतु वर्तमान ढांचा 17वीं शताब्दी में मराठा शासको द्वारा पुनर्निमित किया गया भक्त यहां भैरव अष्टमी और काल अष्टमी को विशेष रूप से आते हैं यह अनोखा अनुष्ठान मंदिर अन्य शिवालयों से अलग बनाता है सुबह 5:00 से रात 9:00 बजे तक खुला रहने वाला या मंदिर शांत चाहने वालों और अंधविश्वास से मुक्त जीवन की खोज करने वालों दोनों के लिए आकर्षण केंद्र है

10. संकट मोचन हनुमान मंदिर
संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी के पुराने काशी क्षेत्र में स्थित एक जीवन धार्मिक स्थल है यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना माना जाता है जब स्थानीय संत तुलसी दास ने इस स्थान पर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की थी कहा जाता है कि तुलसीदास को यहां पर एक दिव्य सपना आया जिसमें हनुमान जी ने उन्हें संकट में सहायता का आश्वासन दिया इसलिए इस स्थान का नाम संकट मोचन रखा गया मंदिर का मुख्य द्वार लाल पत्थर से बना है और ऊपर शिखर पर छोटे-छोटे घंटियां की श्रृंखला लगी है जो भक्तों की आवाज को दूर-दूर तक पहुंचती है अंदर हनुमान जी की काली पत्थर की मूर्ति स्थापित है जिसके सामने एक छोटा जलाशय है जहां श्रद्धालु अपने मन की इच्छाएं लिखकर डालते हैं हर मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजा होती है और रामनवमी तथा हनुमान जयंती पर भव्य शोभा यात्रा निकलती है मंदिर परिसर में एक छोटा बगीचा और प्राचीन पुस्तकालय भी है जहां हनुमान चालीसा और अन्य धार्मिक ग्रंथ उपलब्ध हैं दूर-दराज से आने वाली यात्रियों को यहां की शांति और हनुमान जी की भक्ति में डूबने का अवसर मिलता है जिससे उनका मन हल्का और आशा से भर जाता है

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